Saturday, December 31, 2011

मोक्ष


न बीस सालों में वह अपनी बेटी से नहीं मिला था | वह नहीं चाहता था कि उसकी बेटी को पता चले कि उसका पिता कौन है | अपनी सारी हैवानियत को आज ताक पर रखकर वह अपनी बेटी को एक नजर देखना चाहता था | वह उसको क्या बताएगा कि वह कौन है, एकबारगी आंसुओं ने उसकी आँखों में घर बना लिया था | लेकिन वह कभी कमजोर नहीं पड़ा है, तो आज क्यूँ ? एक नादान लड़की जो महज पच्चीस बरस की होगी, भला उसकी बिसात क्या है ? क्या पूछ लेगी वह ? दुनिया की उसे समझ ही कितनी है ? और दिल ही दिल में वह इस बात की उम्मीद करता रहा कि वह वाकई में वैसा ही हो जैसा वो नहीं है | सलीन, कितना प्यारा नाम है, उसने सोचा | ऐसा नहीं है कि वह अपनी ही बेटी का नाम नहीं जानता था | बल्कि यह नाम उसे उसने ही दिया था, सलीन | लेकिन कभी इस बारे में उसने नहीं सोचा कि वह नाम इस कदर खूबसूरत हो सकता है | चीजें अपने आप में कितनी मिठास भरी हो सकती हैं, है न ? कोलोन डालते हुए उसने खुद को शीशे में देखा, वह पच्चीस का लग रहा था | उसे लग रहा था कि वह अपनी ही बेटी से छोटा हो गया है | दुनिया को अपने इशारों पर नचाने की कोशिश करने में उसने उम्र का एक बेहद जरुरी हिस्सा गँवा दिया था | लेकिन आज वो उसे वापस पा रहा था |

"सलीन, तुम बेहद खूबसूरत हो | तुम अपनी माँ पर गयी हो ? "
"नहीं , पापा पर. माँ कहती थी कि वे बेहद खूबसूरत थे, लड़कियों की तरह | उनके रेशमी बाल थे, और उनकी आँखें बिलकुल आपकी आँखों की तरह थी, गहरी नीली | उनकी कोरों पर हलकी नमी रहती थी , जैसे गहरे समंदर में डोलती कोई छोटी सी नौका |"
"ये सब तुम्हारी माँ ने तुम्हें बताया ?"
"नहीं !" सलीन के चेहरे पर अनिश्चितता के भाव थे |
"फिर ...?"
"पहले मुझे एक आइसक्रीम खानी है |" सलीन ने जिद की |
"नहीं ! पहले तुम मुझे बताओ |" उसने इनकार जरुर किया , लेकिन इनकार के लिए नहीं, वह बस उसकी जिद देखना चाहता था | यह प्यास, एक अधूरी कविता की तरह थी, जो मूर्त रूप लेने से पहले छाई उदासी को और घना करती जाती है | वह चुप रही, उसे दुःख हुआ कि बेवजह उसने उसे नाराज किया | जब सलीन की जिद करने की उम्र थी तब वह उसके आसपास नहीं था |
"आप गंदे हो | मुझे पहले आइसक्रीम चाहिए |"
उसकी आँखों में अब पुरकशिश सुकून था | आइसक्रीम खाने के बाद वे दोनों हाथ थाम कर वैलिस के किनारे घडी भर बैठे |
"तुम इतने बूढ़े हो, तुम्हें मेरे साथ घूमने में शर्म नहीं आती ?" सलीन ने कहा | वह मुस्कुराया, समंदर पर डोलती नाव को आँखों में बसा लेने के लिए |
"मुझे खूबसूरत लड़कियों के साथ घूमना पसंद है | वैसे तुम्हें तो मेरे साथ घूमने में कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए, बहुत सारी लड़कियां उम्र में काफी बड़े इंसान के साथ डेट करती हैं |"
"मुझे कोई परेशानी नहीं |" सलीन ने नौका पर खड़े होकर पाल को आगोश में भर लेने जितनी अंगडाई ली | "आप मेरे पिता को जानते थे , है न ?"
"हाँ, लेकिन तुम उनके बारे में कुछ तो जानती ही होगी |"
"उनकी आँखें ... और वे विओलिन भी बहुत अच्छा बजाते थे |"
यह उसका ट्रेडमार्क था | अपने शिकार को फंसाने के लिए वह अक्सर इसका इस्तेमाल करता था, विओलिन बजाने का | तोमसो विताली की एक एक धुन उसके कानों में चीखों के शीशे उडेलती रही |
"और..." वाइन का एक कड़वा घूँट लेते हुए उसने पूछा |
"और बाकी कुछ नहीं |" सलीन के चेहरे पर चन्द्रमा की घटती कलाएं थी |
वक्त बदला, शरद के पूर्ण चन्द्र ने आखिर दस्तक दी |"मुझे लगता है मेरे पिता एक सिपाही थे |" वह भी मुस्कुरा पड़ा | उसने सलीन के गीले होंठों के किनारे को ऊँगली से छुआ, जिस पर वाइन की एक बहकी सी लकीर खिंच आई थी |

"आप मेरे पिता को जानते थे, है न ?" सलीन की चमकदार आँखों में दुनियादारी का लेश भी न था |
"तुम्हें क्यूँ लगता है कि तुम्हारे पिता एक सिपाही थे ?" वह सिर्फ़ पूछने के लिए पूछना चाहता था | सवाल ,सवाल बेहिसाब सवाल उसे पसंद थे | बस सवाल ही बचे रह जायेंगे आखिरी में , जहाँ से चले थे जब सवाल लेके चले थे |
"ऊं ..." सलीन ने कुछ देर सोचने की मुद्रा बनायीं | "ऐसे ही ... उन्हें वर्दी पहने ही देखा है | मैं रातों को सपने में कई बार भाग कर उनके पास गयी हूँ, और उन्होंने मुझे गोद में उठा लिया है | पूरा आसमान मेरी मुट्ठी में भिंचा चला जाता है | तभी अचानक गोलियों का शोर सुनाई देता है , और मेरी नींद टूट जाती है | बचपन में बहुत बार ये सपने देखे थे मैंने , इसलिए अब याद भी हो गए |"
"क्या तुम्हें अब भी ये सपना आता है ?" उसने आँखों को पहाड़ों के पीछे छिपा दिया |
"नहीं, अब ज्यादा नहीं आता | लेकिन कुछ दो तीन महीने पहले देखा था उन्हें |" सलीन की उदासियाँ बिना शीर्षक की कहानियां थी |
"आपको सपने आते हैं ?" सलीन ने उसके हाथों को छुआ |
"नहीं , अब नहीं !" उसने झूठ बोला | सच ये था कि हर रोज , हर वक्त उसे सपने आते थे | लाशें ही लाशें , और उनके बीच वह सोता हुआ , खुद भी एक लाश जैसा |
"क्या तुमने कभी सोचा है कि तुम्हारे पिता कुछ और भी हो सकते हैं ?" उसने आँखों को वापस माथे पर चढा लिया | सलीन की बदली त्योरियों ने जिन्हें वापस जगह पर फिट सा कर दिया |
"नहीं !" सलीन चाँद के धब्बों में भी खूबसूरती ढूँढने लगी | "मेरे पिता एक सैनिक थे | जो अपने देश से प्यार करते थे | उन्होंने इस देश के लिए अपनी जान दे दी थी | माँ के लिए इस बारे में बात करना काफी तकलीफदेह है, इसलिए माँ इस बारे में कुछ नहीं कहती |" बोम्ब के धमाके विओलिन की स्वरलहरियों के साथ एक अजीब तरह का फ्यूज़न करने लगी , उसे सुनने की कोशिश में उसके कानों की दीवारें हिल गयी | फ्रांसेस्को मारियो वेरासिनी के हाथ में एक मिसाइल लौन्चेर था , जिसके हर एक बटन से संगीत निकल रहा था |
"अगर तुम्हें पता चले कि तुम्हारे पिता एक संगीतकार ... ?" बोम्ब के धमाकों के बीच वह अपनी ही आवाज सुनने के कोशिश कर रहा था | सहसा उसे महसूस हुआ कि वह काफी चिल्लाकर बोल रहा है तो वह बीच में ही रुक गया |
"ओह, क्या वाकई ?" सलीन ने काफी नाखुश होने का भाव जतलाया |
"हाँ , और बोम्ब से उसे उतना ही डर लगता है जितना कि तुम्हें छिपकली से लगता है |" सलीन को यह सुनकर खुशी नहीं मिली | वह उसके चेहरे के भाव पढ़ सकता था |

सलीन ने अपने चेहरे को उसकी तरफ मोड़ा तो उसकी आँखों में आंसू थे | "क्या ये सब मेरे पिता ने झेला है ?" उसने पूछा |
"हाँ !" उसकी ठहरी आँखों में पुतलियाँ संतुलन बनने की कोशिश में लगी थीं | "लेकिन फिर भी उन्होंने उफ़ तक नहीं की |" वह खामोश वैलिस को देखता रहा | वैलिस की खामोशी उसकी हड्डियों के अंदर तक जम चुकी थी, "तुम्हारे पिता एक कलाकार थे | एक उम्दा कलाकार |"
"सलीन !" उसने सलीन के बालों को एक और हटाया | सलीन के कंधे उजली चांदनी में उतने ही स्वच्छ और निर्मल दिख रहे थे जितने वो बरसों पहले याद कर सकता था |  खून सने हुए साफ़ कंधे, जैसे सावन की बारिश ने पत्तों पर जमा गर्द को एक ही बौछार से साफ़ कर दिया हो | उसकी नन्ही गर्दन जिस पर एक छोटा बेचारा सा तिल था , उस पर उसने अपनी ऊँगली रखी | आहिस्ता से , जैसे उसे जगाने से डर रहा हो | सलीन की आँखों को चूमकर उसने जब उन्हें देखा तो नन्ही रोशनियाँ अभी भी छटपटा रही थी |
"क्या तुम थोड़ी देर और नहीं ठहर सकते ?" सलीन ने जब उसे सिगार निकालते हुए देखा तो पूछा , अक्सर वह जाते वक्त ही सिगार निकालता था |
"बेशक ठहर सकता हूँ |" वह फिर से बैठ गया | सलीन ने उसके कन्धों पर सर टिका दिया |
"उन्हें बचाया जा सकता था , है न ?"उसने पूछा | उसने कोई जवाब नहीं दिया | जवाब उसे भी मालूम न था | क्या वाकई उसे बचाया जा सकता था ? आज पहली बार इस सवाल का सामना उसने किया था |
"बोम्ब के धमाके में ... कैसे उन्हें , उनके जैसे कलाकार को कोई कैसे ?" सलीन जैसे सोते से बोली |
"तुम उसे दुनिया में सबसे ज्यादा अजीज़ थी सलीन |" जब वह जाने के लिए उठा तो सलीन ने उसे बांहों में भर लिया | उसने दूर होने की कोशिश की लेकिन, उसकी जकड कसती ही जा रही थी | उसने एकदम जैसे फंदे से खुद को आजाद किया |
"क्या तुम कल आओगे ?"
"हां, जरुर ! मैं जरुर आऊंगा " उसने दो कदम आगे बढ़कर कहा , "मेरा इंतज़ार करना , यहीं ! वैलिस के किनारे !"

जब वह घर पहुंचा तो काफी रात हो चुकी थी | कमरे को चारों और से बंद कर के, खिड़कियों और दरवाजों को दोबारा पड़ताल करके उसने महसूस किया | अपने अंतस और बाहर की आवाजों से मुक्ति पाने के लिए उसने टेलिविज़न चला दिया | घर में कोई शोर चलता रहे तो अच्छा है | 'दी व्हाईट चैपल मर्डर मिस्ट्री, टुनाईट एट एलेवेन ... कीप वाचिंग हिस्टरी चैनल'| अपने सारे कपडे उतार कर वह आदमकद आईने के सामने खड़ा हो गया | काफी देर तक वह अपनी आँखों को गौर से देखता रहा | झूठ, एक झूठ उसे मोक्ष दिला सकता है , उसने नहीं सोचा था | यीशु ने जब कहा था कि पतितों के लिए भी मोक्ष है , तब वे झूठ नहीं कह रहे थे | फिर उसने सिगार अपने मुंह से लगा कर लाइटर जला दिया | कमरा एक धमाके से गूँज उठा | उसकी आँखों के समंदर में डोलती कश्ती गश खाती रही, उसे आज सही ठौर मिला, और वह मुस्कुराया |

अगले रोज सलीन अकेली वैलिस के किनारे बैठी रही |

नोट  : दी व्हाईट चैपल मर्डर मिस्ट्री, जैक दी रिपर नाम से मशहूर एक अनजान सीरियल किलर ने १८८८ में कुछ महिलाओं की अविश्वसनीय क्रूरता से हत्या कर दी थी |